लव-मात्र साधु-संगे सर्व-सिद्धि हय। (चै .म. 22.54) भक्तों के साथ थोड़ी सी भी संगति से जीवात्मा इस दयनीय भौतिक स्थिति से बाहर निकल सकती है। इसलिए यह कृष्ण-भावनामृत आंदोलन सभी को साधु-संतों से संगति करने का मौका देने का प्रयास कर रहा है। इसलिए इस कृष्ण-भावनामृत मण्डली के सभी सदस्यों को स्वयं भी पूर्ण साधु होना चाहिए, ताकि गिरती हुई जीवात्माओं को सहारा दिया जा सके। यह श्रेष्ठ मानवोचित कार्य है।
