Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.14.34: बद्ध आत्मा को अनेक दैहिक दुखों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि अत्यधिक ठंड तथा तेज हवा के प्रभाव। उसे अन्य जीवों के कार्यों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी कष्ट होता है। जब वह इनका मुकाबला करने में असमर्थ होकर दयनीय स्थिति में रहता है, तो स्वाभाविक रूप से वह बहुत दुखी हो जाता है, क्योंकि वह भौतिक सुविधाओं का आनंद लेना चाहता है। | bhagavat अध्याय 5.14: भौतिक संसार भोग का एक विकट वन । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बद्ध आत्मा को अनेक दैहिक दुखों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि अत्यधिक ठंड तथा तेज हवा के प्रभाव। उसे अन्य जीवों के कार्यों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी कष्ट होता है। जब वह इनका मुकाबला करने में असमर्थ होकर दयनीय स्थिति में रहता है, तो स्वाभाविक रूप से वह बहुत दुखी हो जाता है, क्योंकि वह भौतिक सुविधाओं का आनंद लेना चाहता है।
The conditioned soul has to endure many bodily sufferings, such as extreme cold and strong winds. He also suffers due to the activities of other living entities and natural calamities. When he is unable to withstand them and lives in a miserable state, he naturally becomes very distressed because he wants to enjoy worldly comforts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥