जैसे एक बन्दर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूदता रहता है, उसी तरह से एक बंधी हुई आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में जाती रहती है। जैसे बंदर को अंततः एक शिकारी पकड़ लेता है और वह भाग नहीं पाता, उसी तरह से यह बंधी हुई आत्मा क्षणिक यौन सुख में फंसकर अलग-अलग तरह के शरीरों से जुड़ जाती है और पारिवारिक जीवन में फंस जाती है। पारिवारिक जीवन में बंधी हुई आत्मा को क्षणिक यौन सुख का आनंद मिलता है और वह पूरी तरह से भौतिक बंधनों से बाहर निकलने में असमर्थ हो जाती है।
Just as a monkey keeps jumping from one tree to another, similarly a conditioned soul keeps moving from one body to another. When a hunter finally captures a monkey, it cannot escape. Similarly, this conditioned soul, entangled in momentary sense gratification, gets attached to different types of bodies and gets bound in domestic life. In domestic life, the conditioned soul enjoys momentary sense pleasure and thus becomes completely incapable of getting out of the material clutches.
तात्पर्य
जैसे कि श्रीमद्भागवत (11.9.29) में कहा गया है: विषयः खलु सर्वतः स्यात्। शारीरिक आवश्यकताएँ - खाना, सोना, मैथुन और बचाव - जीवन के किसी भी रूप में आसानी से उपलब्ध हैं। यहां कहा गया है कि वानर (बंदर) का लैंगिकता की ओर बहुत अधिक आकर्षण है। प्रत्येक बंदर कम से कम दो दर्जन पत्नियों को रखता है, और वह मादा बंदरों को पकड़ने के लिए एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूदता है। इस प्रकार वह तुरंत यौन संबंध बनाता है। इस प्रकार बंदर का काम एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूदना और अपनी पत्नियों के साथ यौन संबंध बनाना है। सशर्त आत्मा भी यही काम कर रही है, एक शरीर से दूसरे शरीर में संक्रमण हो रही है और यौन संबंध बना रही है। वह इस प्रकार भौतिक मोह के चंगुल से मुक्त होने के तरीके को पूरी तरह से भूल जाता है। कभी-कभी बंदर को एक शिकारी पकड़ लेता है, जो उसके शरीर को डॉक्टरों को बेच देता है ताकि उसके ग्रंथियों को दूसरे बंदर के लाभ के लिए हटाया जा सके। यह सब आर्थिक विकास और बेहतर यौन जीवन के नाम पर चल रहा है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥