श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 14: भौतिक संसार भोग का एक विकट वन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.14.26 
क्‍वचिन्मिथो व्यवहरन् यत्किञ्चिद्धनमन्येभ्यो वा काकिणिकामात्रमप्यपहरन् यत्किञ्चिद्वा विद्वेषमेति वित्तशाठ्यात् ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
धन से जुड़े लेन-देन की बात करें तो एक कौड़ी या उससे भी कम रकम चुराने पर भी दो लोग परस्पर शत्रु बन जाते हैं।
 
As far as money transactions are concerned, if one person defrauds another of a penny or even less, they become mutual enemies.
तात्पर्य
इसे संसार-दावानल कहा जाता है। दो लोगों के बीच साधारण लेन-देन में भी हमेशा धोखा होता है क्योंकि सशर्त आत्मा चार प्रकार से दोषपूर्ण होती है - वह भ्रमित होती है, वह गलतियाँ करती है, उसका ज्ञान अपूर्ण होता है, और उसमें धोखा देने की प्रवृत्ति होती है। जब तक कोई भौतिक स्थिति से मुक्त नहीं हो जाता, तब तक ये चारों दोष वहाँ अवश्य होने चाहिए। परिणामस्वरूप प्रत्येक मनुष्य में धोखा देने की प्रवृत्ति होती है, जिसे व्यवसाय या धन के लेन-देन में नियोजित किया जाता है। हालाँकि दो मित्र शांतिपूर्वक एक साथ रह सकते हैं, लेकिन धोखा देने की अपनी प्रवृत्ति के कारण वे दुश्मन बन जाते हैं जब उनके बीच लेन-देन होता है। एक दार्शनिक किसी अर्थशास्त्री पर धोखेबाज होने का आरोप लगाता है, और एक अर्थशास्त्री किसी दार्शनिक पर धोखेबाज होने का आरोप लगा सकता है जब वह धन के संपर्क में आता है। किसी भी मामले में, यही भौतिक जीवन की स्थिति है। कोई उच्च दर्शन का दावा कर सकता है, लेकिन जब उसे धन की आवश्यकता होती है, वह धोखेबाज बन जाता है। इस भौतिक दुनिया में, तथाकथित वैज्ञानिक, दार्शनिक और अर्थशास्त्री किसी न किसी तरह से धोखेबाजों के अलावा कुछ नहीं हैं। वैज्ञानिक धोखेबाज हैं क्योंकि वे विज्ञान के नाम पर बहुत सी बोगस चीजें प्रस्तुत करते हैं। वे चंद्रमा पर जाने का प्रस्ताव रखते हैं, लेकिन वास्तव में वे अपने प्रयोगों के लिए जनता के पूरे पैसे को धोखा देकर समाप्त कर देते हैं। वे कुछ भी उपयोगी नहीं कर सकते। जब तक कोई व्यक्ति चार बुनियादी दोषों से परे नहीं जा पाता, तब तक किसी को भी सलाह स्वीकार नहीं करनी चाहिए और भौतिक स्थिति का शिकार नहीं बनना चाहिए। सबसे अच्छी प्रक्रिया श्रीकृष्ण या उनके वास्तविक प्रतिनिधि की सलाह और निर्देश लेना है। इस तरह से व्यक्ति इस जीवन और अगले जन्म में सुखी रह सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)