श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 14: भौतिक संसार भोग का एक विकट वन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.14.22 
कर्हि स्म चित्काममधुलवान् विचिन्वन् यदा परदारपरद्रव्याण्यवरुन्धानो राज्ञा स्वामिभिर्वा निहत: पतत्यपारे निरये ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
बद्ध आत्मा कभी-कभी इंद्रिय संतुष्टि से मिलने वाले थोड़े से सुख की ओर आकर्षित हो जाती है। फलस्वरूप, वह अवैध यौन संबंधों में लिप्त हो जाती है या दूसरों की संपत्ति चुराती है। ऐसे समय में उसे सरकार द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है या महिला के पति या संरक्षक द्वारा उसे दंडित किया जा सकता है। इस प्रकार, केवल थोड़ी सी भौतिक संतुष्टि के लिए, वह नारकीय स्थिति में आ जाती है और उसे बलात्कार, अपहरण, चोरी आदि के लिए जेल में डाल दिया जाता है।
 
Sometimes the conditioned soul is attracted to the momentary pleasure derived from sense-gratification. As a result, he indulges in illicit sexual relations or steals someone else's wealth. In such a case, he is imprisoned by the king. Or the woman's husband or her guardian punishes him. Thus, for a little material satisfaction, he ends up in a hellish state and is imprisoned for rape, kidnapping, theft and similar acts.
तात्पर्य
भौतिक जीवन ऐसी है कि अवैध सेक्स, जुआ, नशीली दवाओं की लत और मांस खाने के कारण, अनुकूलित आत्मा हमेशा खतरनाक स्थिति में रहती है। मांस खाने और नशीली दवाओं के सेवन से इंद्रियाँ अधिक से अधिक उत्तेजित होती हैं, और अनुकूलित आत्मा महिलाओं का शिकार हो जाती है। महिलाओं को रखने के लिए, पैसे की आवश्यकता होती है और पैसा प्राप्त करने के लिए, भिक्षा माँगते हैं, उधार लेते हैं या चोरी करते हैं। वास्तव में, वह घृणित कार्य करता है जिसके कारण उसे इस जीवन में और अगले जीवन में कष्ट उठाना पड़ता है। नतीजतन अवैध सेक्स को उन लोगों द्वारा रोका जाना चाहिए जो आध्यात्मिक रूप से झुके हुए हैं या जो आध्यात्मिक बोध के मार्ग पर हैं। कई भक्त अवैध सेक्स के कारण नीचे गिर जाते हैं। वे पैसे चुरा सकते हैं और अत्यधिक सम्मानित त्यागी आदेश से गिर भी सकते हैं। फिर आजीविका के लिए वे बुनियादी सेवाएँ स्वीकार करते हैं और भिखारी बन जाते हैं। इसलिए शास्त्र में कहा गया है, यन मैथुनादि-गृहमेधि-सुखं हि तुच्छम: भौतिकवाद सेक्स पर आधारित है, चाहे वह वैध हो या अवैध। जो लोग पारिवारिक जीवन के आदी हैं, उनके लिए भी सेक्स खतरों से भरा है। किसी के पास सेक्स का लाइसेंस है या नहीं, बड़ी परेशानी है। बहु-दुःख-भाग: सेक्स में लिप्त होने के बाद, कई तरह के दुख होते हैं। भौतिक जीवन में एक व्यक्ति को अधिक से अधिक कष्ट होता है। एक दुखी व्यक्ति के पास जो धन है उसका वह सही ढंग से उपयोग नहीं कर सकता है, और इसी तरह एक भौतिकवादी व्यक्ति मानव शरीर का दुरुपयोग करता है। आध्यात्मिक मुक्ति के लिए इसका उपयोग करने के बजाय, वह शरीर को इंद्रिय संतुष्टि के लिए उपयोग करता है। इसलिए उसे कंजूस कहा जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)