हित्वात्र्मा-पातां गृहम अंध-कूपं
वनं गतो यद् धरिम आश्रयेत
खेत में तथाकथित आरामदायक पारिवारिक स्थिति की तुलना एक अंधेरे कुएं से की जाती है। यदि कोई घास से ढंके एक अंधेरे कुएं में गिर जाता है, तो बचाव के लिए उसकी पुकार के बावजूद उसकी जान चली जाती है। इसलिए उच्च रूप से उन्नत आध्यात्मिक व्यक्ति सलाह देते हैं कि किसी को गृहस्थ-आश्रम में प्रवेश नहीं करना चाहिए। ब्रह्मचर्य-आश्रम में तपस्या के लिए खुद को तैयार करना और जीवन भर एक शुद्ध ब्रह्मचारी बने रहना बेहतर है जिससे कि गृहस्थ-आश्रम में सांसारिक जीवन के चुभने वाले कांटों को महसूस ना करना पड़े। गृहस्थ-आश्रम में व्यक्ति को मित्रों और रिश्तेदारों से निमंत्रण स्वीकार करने होते हैं और अनुष्ठानिक समारोह करने होते हैं। ऐसा करने से, व्यक्ति इन चीजों में बंध जाता है, हालांकि उसके पास इन्हें जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हो सकते हैं। गृहस्थ जीवन शैली को बनाए रखने के लिए, व्यक्ति को धन अर्जित करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इस प्रकार व्यक्ति सांसारिक जीवन में फंस जाता है, और वह कांटों के चुभने से पीड़ित होता है।
