श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 12: महाराज रहूगण तथा जड़ भरत की वार्ता  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.12.9 
एवं निरुक्तं क्षितिशब्दवृत्त-
मसन्निधानात्परमाणवो ये ।
अविद्यया मनसा कल्पितास्ते
येषां समूहेन कृतो विशेष: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
यह कहना सही है कि विविधता स्वयं पृथ्वी से ही उत्पन्न होती है। लेकिन यह ब्रह्माण्ड भले ही थोड़े समय के लिए सत्य प्रतीत हो, इसका वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं है। मूलतः पृथ्वी सूक्ष्म कणों के मेल से बनी, लेकिन ये कण स्थायी नहीं हैं। वास्तविकता यह है कि परमाणु ही ब्रह्माण्ड का कारण नहीं है, यद्यपि कुछ दार्शनिक ऐसा मानते हैं। यह सच नहीं है कि इस भौतिक जगत में पाई जाने वाली विविधताएँ परमाणुओं के विविध संयोगों का परिणाम हैं।
 
One may say that diversity arises from the earth itself. However, this universe, though it may appear true for a short time, actually has no existence. The earth was originally created by the combination of tiny particles, but these particles are temporary. In fact atoms are not the cause of the universe, although some philosophers think so. It is not true that the diversity (variety) found in this world is the result of the mismatch or various combinations of atoms.
तात्पर्य
जो परमाणु सिद्धांत का अनुसरण करते हैं, वह मानते हैं कि परमाणुओं के प्रोटान और इलेक्ट्रॉन इस तरह से मिलते हैं जिससे भौतिक सृष्टि का निर्माण होता है। परंतु, वैज्ञानिक स्वयं परमाणुओं के अस्तित्व के कारण को खोज पाने में विफल हो जाते हैं। इन परिस्थितियों में, हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि परमाणु ही ब्रह्मांड का कारण है। इस तरह के सिद्धांत अज्ञानी लोगों द्वारा ही दिए जाते हैं। वास्तविक बुद्धि के अनुसार, सृष्टि की वास्तविक वजह परमेश्वर हैं। जन्माद्यस्य यतः: वे समस्त सृष्टि के मूल कारण हैं। जैसा कि भगवद्गीता (10.8) में कहा गया है: अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्व प्रवर्तते। कृष्ण ही मूल कारण हैं। सर्व-कारण-कारणम: वे सभी कारणों का कारण हैं। कृष्ण ही परमाणुओं और भौतिक ऊर्जा के कारण हैं।

भूमिरापोऽनलो वायुः

खं मनो बुद्धिर एवं च

अहंकार इतीयं मे

भिन्ना प्रकृतिरष्टधा

(भगवद्गीता 7.4)

अंतिम कारण परमेश्वर हैं, और केवल अज्ञानी ही अलग-अलग सिद्धांतों के द्वारा अन्य कारणों को खोजने की कोशिश करते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)