शूलपाणि-सम यदि भक्त-निंदा करे
भागवत प्रमाण - तथापि शीघ्र मरे
हेना वैष्णवेर निंदे सर्वज्ञ हा-इ
से जनैरा अधः-पाता सर्व-शास्त्रे का-इ
"यदि व्यक्ति भगवान शिव जैसा भी हो, जो अपने हाथों में त्रिशूल धारण करते है, भले ही वह भक्त की निंदा करने की कोशिश करे, फिर भी वह अपने अध्यात्मिक पद से पतन हो जाता है। यह सभी वैदिक धर्मग्रंथों का निष्कर्ष है।" वह चैतन्य-भागवत (मध्य 22) में भी कहते हैं:
वैष्णवेर निंदा करिबेका यारा गण
तारा रक्षा सामर्थ्य नाहीका कोण जन
शूलपाणि-सम यदि वैष्णवेर निंदे
तथापिहा नाश याया - कहै शास्त्र-वृंदे
इहाँ ना मानिया ये सुजन निंदा करे
जन्मे जन्मे से पापिष्ठ दैव-दोषे मरे
"जो वैष्णव की निंदा करता है उसे कोई भी बचा नहीं सकता। यदि कोई व्यक्ति भगवान शिव जितना भी शक्तिशाली हो, फिर भी अगर वह वैष्णव की निंदा करता है तो वह अवश्य ही नष्ट हो जाता है। यह सभी शास्त्रों का निष्कर्ष है। यदि कोई शास्त्रों के निर्णय की परवाह नहीं करता है और वैष्णव की निंदा करता है, तो वह इसके कारण जीवन के बाद के जन्मों में पीड़ित होता है।"
