आपकी बातों में मुझे कई तरह की विरोधाभासी बातें दिख रही हैं। हे दीनबन्धु, मैंने आपका अपमान करके बड़ा अपराध किया। राजा का शरीर धारण करने से मेरा मन झूठी प्रतिष्ठा से फूल गया था। इस कारण के लिए, मैं ज़रूर अपराधी हो गया हूँ। अब मेरी प्रार्थना है कि मुझ पर निस्वार्थ कृपा की दृष्टि डालें। अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपका अपमान करके मैंने जो पाप किए हैं, उनसे मैं मुक्त हो जाऊँगा।
I find contradictions in whatever you have said. O friend of the poor, I have committed a great crime by insulting you. Having taken the form of a king, I was puffed up with false prestige, so I am certainly guilty for this. Now I pray that you cast a glance of causeless grace upon me. If you do so, I will be freed from the sin I have committed by insulting you.
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा है कि वैष्णव का अपमान करने से व्यक्ति अपने सभी आध्यात्मिक कार्यों को समाप्त कर लेता है। वैष्णव का अपमान पागल हाथी के अपराध के समान माना जाता है। एक पागल हाथी पूरे बाग को नष्ट कर सकता है जिसे बड़ी मेहनत से विकसित किया गया हो। व्यक्ति भक्ति सेवा के उच्चतम स्तर को प्राप्त कर सकता है, लेकिन किसी भी तरह से यदि वह वैष्णव का अपमान करता है, तो पूरी संरचना ध्वस्त हो जाती है। अनजाने में, राजा राहुगण ने जड़ भरत का अपमान किया, लेकिन अपने अच्छे विवेक के कारण, उन्होंने माफ़ी मांगी। यही वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वैष्णव-अपराध से मुक्त हुआ जा सकता है। कृष्ण हमेशा बहुत सरल और स्वभाव से दयालु होते हैं। जब कोई व्यक्ति वैष्णव के चरणों में अपराध करता है, तो उसे तुरंत ऐसे व्यक्तित्व से माफ़ी मांगनी चाहिए ताकि उसकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधा न आए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥