आपने कहा है कि, "मैं मेहनत करने से नहीं थकता।" भले ही आत्मा शरीर से अलग है, फिर भी शारीरिक मेहनत करने से थकान होती है और यह आत्मा की ही थकान लगती है। जब आप पालकी ले जा रहे होते हैं, तो इसमें कोई शक नहीं कि आत्मा को भी कुछ मेहनत करनी पड़ती होगी। मेरा ऐसा अनुमान है। आपने यह भी कहा है कि मालिक और नौकर के बीच जो बाहरी व्यवहार दिखता है, वह असली नहीं होता, मगर प्रत्यक्ष दुनिया में भले ही वह असली न हो, फिर भी प्रत्यक्ष दुनिया की चीज़ें चीजों को प्रभावित कर सकती हैं। यह देखने और समझने वाली बात है। इसलिए, भले ही भौतिक गतिविधियाँ अस्थायी हों, लेकिन उन्हें झूठा नहीं कहा जा सकता।
You said, "I do not get tired of working." Although the soul is separate from the body, physical work causes fatigue and it seems that it is the fatigue of the soul. When you are carrying the palanquin, the soul must also have to work some. This is my guess. You have also said that the external behavior of the master and the servant is not real, but even if this is not true in the visible world, objects can still be affected by the objects of the visible world. This is visible and experienced. Therefore, even though physical activities are temporary, they cannot be called false.
तात्पर्य
इह मायावादावाद के सैद्धांतिक निरपेक्षवाद और वैष्णवो के व्यवहारवादी दर्शन की चर्चा है। मायावादी दर्शन इस प्रतिभाशाली संसार को असत्य बताता है, लेकिन वैष्णव दार्शनिकों का इस पर कोई सहमति नहीं है। वो जानते है की यह प्रतिभाशाली संसार एक अस्थायी अभिव्यक्ति है पर यह असत्य नहीं है। हम जो रात को सपना देखते है, वह निश्चित रूप से असत्य होता है, लेकिन एक भयानक सपना भी व्यक्ति को निश्चित रूप से प्रभावित करता है। आत्मा की थकान तथ्यात्मक नहीं होती, लेकिन जितने समय तक व्यक्ति शारीरिक भ्रम में डूबा रहता है, तब तक वह इस तरह के झूठे सपनों से प्रभावित होता है। सपना देखते समय, असली तथ्यों से खुद को बचा पाना नामुमकिन सा हो जाता है, और स्वप्नदोषी व्यक्ति अपने सपनों की वजह से पीड़ित होने के लिए बाध्य हो जाता है। एक पानी का घड़ा मिट्टी का बना होता है और यह अस्थायी होता है। असलियत में कोई पानी का घड़ा नहीं होता है; वहां सिर्फ मिट्टी होती है। हालाँकि, जब तक पानी का घड़ा पानी को अपने अंदर समाने देता है, तब तक हम इसका उसी तरह इस्तेमाल कर सकते है। इसे हम पूर्ण रूप से असत्य तो नहीं कह सकते।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥