श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 10: जड़ भरत तथा महाराज रहूगण की वार्ता  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.10.16 
कस्त्वं निगूढश्चरसि द्विजानां
बिभर्षि सूत्रं कतमोऽवधूत: ।
कस्यासि कुत्रत्य इहापि कस्मात्
क्षेमाय नश्चेदसि नोत शुक्ल: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
राजा रहूगण ने कहा, हे ब्राह्मण, तुम इस जगत में बहुत ही छिपे हुए और दूसरों के लिए अज्ञात प्रतीत हो रहे हो। तुम कौन हो? क्या तुम विद्वान ब्राह्मण और साधु पुरुष हो? मैंने देखा है कि तुमने जनेऊ धारण किया हुआ है। क्या तुम दत्तात्रेय जैसे अवधूतों में से एक हो या फिर कोई बहुत ही विद्वान व्यक्ति हो? क्या मैं पूछ सकता हूँ कि तुम किसके शिष्य हो? तुम कहाँ रहते हो? तुम इस स्थान पर क्यों आए हो? क्या तुम हमारे कल्याण के लिए यहाँ आए हो? कृपया मुझे बताओ कि तुम कौन हो।
 
King Rahugan said, O Brahmin, you seem to be roaming around in this world in a very disguised and unknown manner. Who are you? Are you a learned Brahmin and a saint? You are wearing the sacred thread. Are you one of the learned Avdhoots like Dattatreya etc.? May I ask whose disciple are you? Where do you live? Why have you come to this place? Have you come here for our welfare? Please tell me who you are?
तात्पर्य
महाराज राहुगण वैदिक ज्ञान में अधिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए बहुत उत्सुक थे, क्योंकि वे समझ सकते थे कि जड़ भरत किसी ब्राह्मण परिवार के थे, या तो शिष्य परंपरा से या फिर जन्म से ही ब्राह्मण वंश के थे। जैसा कि वेदों में कहा गया है: तद विज्ञानार्थं स गुरुम् एवाभिगच्छेत। राहुगण जड़ भरत को गुरु के रूप में स्वीकार कर रहे थे, लेकिन एक गुरु को अपनी स्थिति को केवल पावन धागा पहनकर ही नहीं सिद्ध करना चाहिए, बल्कि आध्यात्मिक जीवन में ज्ञान को आगे बढ़ाकर भी सिद्ध करना चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि राहुगण ने जड़ भरत से पूछा कि वे किस परिवार से संबंधित हैं। दो प्रकार के परिवार होते हैं - एक वंश के अनुसार और दूसरा शिष्य परंपरा के अनुसार। किसी भी तरह से, कोई भी व्यक्ति ज्ञानी हो सकता है। शब्द शुक्लः सद्गुण के प्रकार में किसी व्यक्ति को दर्शाता है। यदि कोई आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना चाहता है, तो उसे एक वास्तविक ब्राह्मण-गुरु के पास पहुंचना चाहिए, या तो शिष्य परंपरा में या विद्वान ब्राह्मणों के परिवार में।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)