एवं परंपरा प्राप्तम
इमं राजर्षयो विदुः
स कालेनह महाता
योगो नष्ट परंतप
"इस उच्च विज्ञान को उत्तराधिकार की शृंखला के द्वारा प्राप्त किया गया और संत राजाओं ने इसे इसी तरह समझा। परंतु समय के साथ उत्तराधिकार टूट गया इसलिए यह विज्ञान जैसा कि है, खोया हुआ प्रतीत होता है।"
उत्तराधिकार के द्वारा राजपरिवार महान संतों के समान मंच पर था (राजा ऋषि)। पहले वे जीवन के दर्शन को समझ सकते थे और यह जानते थे कि नागरिकों को कैसे प्रशिक्षित किया जाए ताकि वे उसी स्तर पर आ सकें। दूसरे शब्दों में, वे जानते थे कि नागरिकों को जन्म और मृत्यु के उलझाव से कैसे मुक्त किया जाए। जब महाराजा दशरथ ने अयोध्या पर राज्य किया, तो महान ऋषि विश्वामित्र एक बार राक्षस को मारने के लिए भगवान रामचंद्र और लक्ष्मण को जंगल ले जाने के लिए उनके पास आए। जब संत व्यक्ति विश्वामित्र महाराजा दशरथ के दरबार में आए, तो संत व्यक्ति का स्वागत करने के लिए राजा ने उनसे पूछा, ऐहष्टं यत् तत् पुनर्जनम जयाय। उन्होंने ऋषि से पूछा कि क्या जन्म और मृत्यु के दोहराव पर विजय प्राप्त करने के उनके प्रयास में सब कुछ ठीक चल रहा है। वैदिक सभ्यता की पूरी प्रक्रिया इसी बिंदु पर आधारित है। हमें पता होना चाहिए कि जन्म और मृत्यु के दोहराव पर कैसे विजय प्राप्त की जाए। महाराजा राहुगण भी जीवन के उद्देश्य को जानते थे, इसलिए जब जड़ भरत ने उनके समक्ष जीवन का दर्शन रखा, तो उन्होंने तुरंत उसकी सराहना की। यही वैदिक समाज की नींव है। विद्वान विद्वान, ब्राह्मण, संत व्यक्ति और ऋषि जो वैदिक उद्देश्य के बारे में पूरी तरह से जागरूक थे, ने राजपरिवार को सलाह दी कि सामान्य जनता को कैसे लाभ पहुंचाया जाए और उनके सहयोग से सामान्य जनता को लाभ हुआ। इसलिए सब कुछ सफल रहा। महाराजा राहुगण ने मानव जीवन के मूल्य को समझने की इस पूर्णता को प्राप्त किया, इसलिए उन्होंने जड़ भरत से अपने अपमानजनक शब्दों पर पछतावा किया और वह तुरंत अपनी पालकी से उतरे और जड़ भरत के चरण कमलों पर गिर गए ताकि उन्हें माफ किया जाए और उनसे और सुन सकें। जीवन के मूल्यों के बारे में जिन्हें ब्रह्म जिज्ञासा (परम सत्य की खोज) के रूप में जाना जाता है। वर्तमान समय में, उच्च सरकारी अधिकारी जीवन के मूल्यों से अनभिज्ञ हैं और जब संत व्यक्ति वैदिक ज्ञान का प्रसार करने का प्रयास करते हैं, तो तथाकथित कार्यकारी अपना सम्मानपूर्वक आज्ञा पालन नहीं करते बल्कि आध्यात्मिक प्रचार को बाधित करने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार कोई कह सकता है कि पूर्व राजशाही स्वर्ग के समान थी और वर्तमान सरकार नरक के समान है।
