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bhagavat 5.1.34: तत्पश्चात् राजा प्रियव्रत ने अपनी कन्या ऊर्जस्वती का विवाह शुक्राचार्य से कर दिया, जिनके गर्भ से देवयानी नामक कन्या उत्पन्न हुई।   |   bhagavat अध्याय 5.1: महाराज प्रियव्रत का चरित्र   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 1: महाराज प्रियव्रत का चरित्र  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.1.34 
दुहितरं चोर्जस्वतीं नामोशनसे प्रायच्छद्यस्यामासीद् देवयानी नाम काव्यसुता ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा प्रियव्रत ने अपनी कन्या ऊर्जस्वती का विवाह शुक्राचार्य से कर दिया, जिनके गर्भ से देवयानी नामक कन्या उत्पन्न हुई।
 
After that, King Priyavrata married his daughter Urjaswati to Shukracharya, from whose womb a daughter named Devayani was born.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)