मां च यो 'व्यभिचारेण
भक्ति-योगेन सेवते
स गुणान समतीत्यैतान
ब्रह्म-भूयाय कल्पते
"जो पूर्ण भक्ति सेवा में संलग्न है, जो किसी भी परिस्थिति में नहीं गिरता है, वह तुरंत भौतिक प्रकृति के गुणों को पार कर जाता है और इस तरह ब्रह्म के स्तर पर आ जाता है।" (Bg. 14.26) भले ही हमने अपने पिछले जन्मों में कुछ भी क्यों न किया हो, अगर हम इस जीवन में भगवान की अविभाजित भक्ति सेवा में खुद को संलग्न करते हैं, तो हम हमेशा ब्रह्म-भूत (मुक्त) अवस्था में स्थित रहेंगे, प्रतिक्रियाओं से मुक्त होंगे, और बाध्य नहीं होंगे एक और भौतिक शरीर स्वीकार करें। त्यक्त्वा देहं पुनर् जन्म नैति माम एति सो 'र्जुन (Bg. 4.9)। शरीर को त्यागने के बाद, जिसने उस तरह से काम किया है, वह एक और भौतिक शरीर को स्वीकार नहीं करता है, बल्कि इसके बजाय घर वापस, भगवान के पास जाता है।
