"कली युग में, आध्यात्मिक पूर्णता के लिए, भगवान के पवित्र नाम से बढ़कर और कोई रास्ता नहीं है, और कोई रास्ता नहीं है, और कोई रास्ता नहीं है।" भगवान के पवित्र नामों को सुनने का अवसर सभी को दिया जाना चाहिए, क्योंकि इस प्रकार वह धीरे-धीरे जीवन में अपनी वास्तविक स्थिति को समझ पाएगा और सत्व गुण से ऊपर आध्यात्मिक स्थिति में उठ पाएगा। इस प्रकार उसकी प्रगति में आने वाली सभी बाधाएँ दूर हो जाएँगी। इसलिए, निष्कर्ष यह है कि भगवान द्वारा हमें जिस भी स्थिति में रखा गया हो, उसमें हमें संतुष्ट रहना चाहिए और हमें अपनी भक्ति सेवा में लगे रहने का प्रयास करना चाहिए। तब हमारा जीवन सफल होगा।
