"सर्वस्य चहं हृदि सन्निविष्टो
मत: स्मृतिर् ज्ञानम् अपोहनम् च"
"मैं प्रत्येक के हृदय में विराजमान हूँ, और मुझसे स्मृति, ज्ञान और विस्मरण आता है।" हालाँकि, यह सच नहीं है कि परम व्यक्तित्व भगवान कुछ जीवों को एक तरह से निर्देशन देते हैं और अन्य जीवों को दूसरे तरीके से। सच्चाई यह है कि प्रत्येक जीव की एक निश्चित इच्छा होती है, और परम प्रभु उसे इसे पूरा करने का मौका देते हैं। इसलिए, सबसे अच्छा मार्ग है परम व्यक्तित्व भगवान के समक्ष समर्पण करना और उनकी इच्छा के अनुसार कार्य करना। वह जो ऐसा करता है वह मुक्त हो जाता है।
