श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 9: ध्रुव महाराज का घर लौटना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  4.9.63 
उद्यानानि च रम्याणि विचित्रैरमरद्रुमै: ।
कूजद्विहङ्गमिथुनैर्गायन्मत्तमधुव्रतै: ॥ ६३ ॥
 
 
अनुवाद
राजा का निवास स्थान बगीचों से घिरा हुआ था, जिसमें स्वर्गीय ग्रहों से लाए गए विभिन्न प्रकार के पेड़ थे। उन पेड़ों पर मीठे गीत गाते पक्षियों के जोड़े और लगभग-पागल भौंरे थे, जो बहुत ही मनभावन मधुर ध्वनि करते थे।
 
There were gardens all around the king's palace, which had many kinds of trees brought from the higher realms. On these trees were pairs of birds singing sweet songs and intoxicated bumblebees humming.
तात्पर्य
इस श्लोक में, शब्द अमर-दुमैः,'' स्वर्गलोक से लाए गए पेड़ो,'' का बहुत बड़ा महत्व है | स्वर्गलोक को अमरलोक रूप में जाना जाता है, वह ग्रह जहाँ मृत्यु बहुत विलंब से आती है, कियोंकि वहा के लोग देवताओं की गणना के अनुसार दस हजार वर्ष तक जीवित रहते है, जहाँ हमारे छः माह उनके एक दिन के बराबर होते है | देवता स्वर्गीय ग्रहों पर देवता समय के अनुसार महीनों, वर्षों और दस-हजारों वर्षों तक रहते है, और तदुपरान्त, जब उनके पुण्य कर्मो का फल समाप्त हो जाता है, तब वे इस पृथ्वी पर आते है | ये बातें है जो वैदिक साहित्य से प्राप्त की जा सकती है | जैसे वहा के लोग दस हजार वर्षों तक जीवित रहते है, वैसे ही वहा के पेड़ भी रहते है | निश्चित रूप से, यहाँ इस पृथ्वी पर कई पेड़ है जो दस हजार वर्षों तक जीवित रहते है, तो स्वर्गीय ग्रहों के पेड़ों के बारे में क्या कहना? वे कई दस-हजारों वर्षों से भी अधिक जीवित रहते होंगे, और कभी-कभी, जैसा कि आज भी प्रचलित है, कुछ बहुमूल्य पेड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है |

कही और ऐसा कहा गया है कि जब भगवान कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ स्वर्गलोक गए थे तब वे स्वर्ग से एक पारिजात पुष्प का पेड़ लाए और उसे पृथ्वी पर लाए | कृष्ण और देवताओं के बीच पारिजात वृक्ष को स्वर्ग से इस ग्रह पर लाने के कारण लड़ाई हुई | पारिजात को भगवान कृष्ण के महल में लगाया गया था जहाँ रानी सत्यभामा रहती थीं | स्वर्गीय ग्रहों में फूलों और फलों के पेड़ श्रेष्ठ होते है, कियोंकि वे बहुत सुहावने और स्वादिष्ट होते है, और ऐसा प्रतीत होता है कि महाराज उत्तनापाद के महल में ऐसे पेड़ों की कई किस्मे थी |

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)