Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.9.53: मैत्रेय मुनि ने फिर कहा- हे विदुर, जब सभी लोग इस प्रकार ध्रुव महाराज की प्रशंसा कर रहे थे, तो राजा बहुत प्रसन्न हुआ। उसने ध्रुव और उनके भाई को एक हथिनी की पीठ पर सवार किया। इस तरह वह अपनी राजधानी लौट आया, जहाँ सभी वर्ग के लोगों ने उसकी प्रशंसा की। | bhagavat अध्याय 4.9: ध्रुव महाराज का घर लौटना । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैत्रेय मुनि ने फिर कहा- हे विदुर, जब सभी लोग इस प्रकार ध्रुव महाराज की प्रशंसा कर रहे थे, तो राजा बहुत प्रसन्न हुआ। उसने ध्रुव और उनके भाई को एक हथिनी की पीठ पर सवार किया। इस तरह वह अपनी राजधानी लौट आया, जहाँ सभी वर्ग के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।
Maitreya Muni continued: O Vidura, when everyone was praising Dhruva Maharaja in this way, the king was very happy. He made Dhruva and his brother ride on the back of an elephant. Thus he returned to his capital, where people of all classes praised him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥