श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 9: ध्रुव महाराज का घर लौटना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  4.9.41 
सुनीति: सुरुचिश्चास्य महिष्यौ रुक्‍मभूषिते ।
आरुह्य शिबिकां सार्धमुत्तमेनाभिजग्मतु: ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
राजा उत्तानपाद की दोनों रानियाँ, सुनीति और सुरुचि, और उनका दूसरा पुत्र उत्तम भी स्वागत-यज्ञ में दिखाई दे रहे थे। रानियाँ पालकी में बैठी हुई थीं।
 
राजा उत्तानपाद की दोनों रानियाँ, सुनीति और सुरुचि, और उनका दूसरा पुत्र उत्तम भी स्वागत-यज्ञ में दिखाई दे रहे थे। रानियाँ पालकी में बैठी हुई थीं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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