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श्लोक 4.9.35  |
वाराज्यं यच्छतो मौढ्यान्मानो मे भिक्षितो बत ।
ईश्वरात्क्षीणपुण्येन फलीकारानिवाधन: ॥ ३५ ॥ |
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| अनुवाद |
| पूर्णतः अपनी मूर्खता और पुण्य की कमी के कारण भगवान के निजी सेवा को अस्वीकार कर भौतिक नाम, यश और संपन्नता की कामना की थी। ऐसी ही स्थिति उस गरीब व्यक्ति की थी, जिसको महान सम्राट ने प्रसन्न होकर उसे वरदान देने के लिए कहा तो उसने अज्ञानतावश केवल चावल के कुछ टुकड़े मांगे। |
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| पूर्णतः अपनी मूर्खता और पुण्य की कमी के कारण भगवान के निजी सेवा को अस्वीकार कर भौतिक नाम, यश और संपन्नता की कामना की थी। ऐसी ही स्थिति उस गरीब व्यक्ति की थी, जिसको महान सम्राट ने प्रसन्न होकर उसे वरदान देने के लिए कहा तो उसने अज्ञानतावश केवल चावल के कुछ टुकड़े मांगे। |
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