Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.9.18: मैत्रेय ऋषि ने आगे कहा : हे विदुर, जब ध्रुव महाराज, जो अपनी अंतरात्मा में अच्छे विचारों से पूर्ण थे, ने अपनी प्रार्थना पूरी की तो अपने भक्तों और सेवकों पर अत्यंत दयालु भगवान ने उन्हें बधाई दी, इस प्रकार कहते हुए। | bhagavat अध्याय 4.9: ध्रुव महाराज का घर लौटना । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैत्रेय उवाच
अथाभिष्टुत एवं वै सत्सङ्कल्पेन धीमता ।
भृत्यानुरक्तो भगवान् प्रतिनन्द्येदमब्रवीत् ॥ १८ ॥
अनुवाद
मैत्रेय ऋषि ने आगे कहा : हे विदुर, जब ध्रुव महाराज, जो अपनी अंतरात्मा में अच्छे विचारों से पूर्ण थे, ने अपनी प्रार्थना पूरी की तो अपने भक्तों और सेवकों पर अत्यंत दयालु भगवान ने उन्हें बधाई दी, इस प्रकार कहते हुए।
The sage Maitreya continued: O Vidura, when Dhruva Maharaja, whose heart was full of good thoughts, finished his prayers, the Lord, who is most merciful to His devotees and servants, congratulated him and spoke as follows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥