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bhagavat 4.8.74: तीसरे महीने में वे सिर्फ हर नौ दिन में एक बार पानी पीते थे। इस तरह वे पूरी तरह से समाधि में रहे और भगवान के उस परम व्यक्तित्व की पूजा करते रहे जिनकी प्रशंसा चुने हुए श्लोकों में की जाती है।   |   bhagavat अध्याय 4.8: ध्रुव महाराज का गृहत्याग और वनगमन   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 8: ध्रुव महाराज का गृहत्याग और वनगमन  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  4.8.74 
तृतीयं चानयन्मासं नवमे नवमेऽहनि ।
अब्भक्ष उत्तमश्लोकमुपाधावत्समाधिना ॥ ७४ ॥
 
 
अनुवाद
तीसरे महीने में वे सिर्फ हर नौ दिन में एक बार पानी पीते थे। इस तरह वे पूरी तरह से समाधि में रहे और भगवान के उस परम व्यक्तित्व की पूजा करते रहे जिनकी प्रशंसा चुने हुए श्लोकों में की जाती है।
 
In the third month, he would drink only water on every ninth day. Thus, he would remain in complete Samadhi and continue worshipping Punyashloka Bhagwan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)