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श्लोक 4.8.72  |
त्रिरात्रान्ते त्रिरात्रान्ते कपित्थबदराशन: ।
आत्मवृत्त्यनुसारेण मासं निन्येऽर्चयन्हरिम् ॥ ७२ ॥ |
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| अनुवाद |
| ध्रुव महाराज ने पहले महीने में अपने शरीर के पोषण के लिए हर तीसरे दिन केवल कैथे तथा बेर का भोजन किया और इस प्रकार वे भगवान की पूजा को निरंतर बढ़ाते रहे। |
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| ध्रुव महाराज ने पहले महीने में अपने शरीर के पोषण के लिए हर तीसरे दिन केवल कैथे तथा बेर का भोजन किया और इस प्रकार वे भगवान की पूजा को निरंतर बढ़ाते रहे। |
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