श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 8: ध्रुव महाराज का गृहत्याग और वनगमन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  4.8.71 
तत्राभिषिक्त: प्रयतस्तामुपोष्य विभावरीम् ।
समाहित: पर्यचरद‍ृष्यादेशेन पूरुषम् ॥ ७१ ॥
 
 
अनुवाद
इधर, ध्रुव महाराज मधुवन पहुंचकर यमुना नदी में स्नान किये और उस रात को बड़े ध्यान से उपवास किया। इसके बाद, उन्होंने नारद मुनि द्वारा बताए गए तरीके से भगवान की आराधना शुरू की।
 
इधर, ध्रुव महाराज मधुवन पहुंचकर यमुना नदी में स्नान किये और उस रात को बड़े ध्यान से उपवास किया। इसके बाद, उन्होंने नारद मुनि द्वारा बताए गए तरीके से भगवान की आराधना शुरू की।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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