Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.8.70: मैत्रेय मुनि ने आगे कहा : राजा उत्तानपाद को जब नारद मुनि ने उपदेश दिया, तब उन्होंने अपने विशाल और ऐश्वर्य से परिपूर्ण राज्य के सभी कार्य त्याग दिए और केवल अपने पुत्र ध्रुव के बारे में ही सोचने लगे। | bhagavat अध्याय 4.8: ध्रुव महाराज का गृहत्याग और वनगमन । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैत्रेय मुनि ने आगे कहा : राजा उत्तानपाद को जब नारद मुनि ने उपदेश दिया, तब उन्होंने अपने विशाल और ऐश्वर्य से परिपूर्ण राज्य के सभी कार्य त्याग दिए और केवल अपने पुत्र ध्रुव के बारे में ही सोचने लगे।
Maitreya Muni further said: After receiving teachings from Narada Muni, King Uttanapada gave up all the activities of his vast and opulent kingdom and started thinking only about his son Dhruva.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥