श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 8: ध्रुव महाराज का गृहत्याग और वनगमन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  4.8.49 
काञ्चीकलापपर्यस्तं लसत्काञ्चननूपुरम् ।
दर्शनीयतमं शान्तं मनोनयनवर्धनम् ॥ ४९ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् की कमर में सोने की छोटी-छोटी घंटियाँ हैं, और उनके चरणकमलों में सोने के नूपुर हैं। उनके सभी शारीरिक अंग बेहद आकर्षक और देखने में मनभावन हैं। वे हमेशा शांत और मौन रहते हैं, और आँखों और मन को बहुत मोह लेते हैं।
 
भगवान् की कमर में सोने की छोटी-छोटी घंटियाँ हैं, और उनके चरणकमलों में सोने के नूपुर हैं। उनके सभी शारीरिक अंग बेहद आकर्षक और देखने में मनभावन हैं। वे हमेशा शांत और मौन रहते हैं, और आँखों और मन को बहुत मोह लेते हैं।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas