श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 8: ध्रुव महाराज का गृहत्याग और वनगमन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  4.8.41 
धर्मार्थकाममोक्षाख्यं य इच्छेच्छ्रेय आत्मन: ।
एकं ह्येव हरेस्तत्र कारणं पादसेवनम् ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
जो कोई भी व्यक्ति धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति चाहता है, उसे चाहिए कि स्वयं को सर्वोच्च पुरुषोत्तम भगवान की भक्ति में समर्पित कर दे, क्योंकि उनके चरण-कमलों की पूजा से ही इन सभी की प्राप्ति होती है।
 
जो कोई भी व्यक्ति धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति चाहता है, उसे चाहिए कि स्वयं को सर्वोच्च पुरुषोत्तम भगवान की भक्ति में समर्पित कर दे, क्योंकि उनके चरण-कमलों की पूजा से ही इन सभी की प्राप्ति होती है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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