श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 8: ध्रुव महाराज का गृहत्याग और वनगमन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  4.8.38 
नूनं भवान्भगवतो योऽङ्गज: परमेष्ठिन: ।
वितुदन्नटते वीणां हिताय जगतोऽर्कवत् ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान, आप ब्रह्मा के पुत्र हैं और आप समस्त विश्व के कल्याण हेतु बीन बजाने का काम करते हो। आप उसी सूर्य के समान हो, जो जीवों की भलाई के लिए ब्रह्माण्ड में घूमता रहता है।
 
हे भगवान, आप ब्रह्मा के पुत्र हैं और आप समस्त विश्व के कल्याण हेतु बीन बजाने का काम करते हो। आप उसी सूर्य के समान हो, जो जीवों की भलाई के लिए ब्रह्माण्ड में घूमता रहता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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