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श्लोक 4.8.32  |
अतो निवर्ततामेष निर्बन्धस्तव निष्फल: ।
यतिष्यति भवान् काले श्रेयसां समुपस्थिते ॥ ३२ ॥ |
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| अनुवाद |
| इसी कारण हे बालक, तुम्हें इसके लिए प्रयत्न नहीं करना चाहिए। इसमें तुम्हें सफलता नहीं मिलेगी। अच्छा हो कि तुम घर वापस चले जाओ। जब तुम बड़े हो जाओगे तो ईश्वर की कृपा से तुम्हें इन योग-कर्मों के लिए अवसर मिलेगा। उस समय तुम यह कार्य कर सकते हो। |
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| इसी कारण हे बालक, तुम्हें इसके लिए प्रयत्न नहीं करना चाहिए। इसमें तुम्हें सफलता नहीं मिलेगी। अच्छा हो कि तुम घर वापस चले जाओ। जब तुम बड़े हो जाओगे तो ईश्वर की कृपा से तुम्हें इन योग-कर्मों के लिए अवसर मिलेगा। उस समय तुम यह कार्य कर सकते हो। |
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