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श्लोक 4.8.24  |
मैत्रेय उवाच
एवं सञ्जल्पितं मातुराकर्ण्यार्थागमं वच: ।
सन्नियम्यात्मनात्मानं निश्चक्राम पितु: पुरात् ॥ २४ ॥ |
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| अनुवाद |
| ध्रुव महाराज की माता सुनीति का उपदेश वस्तुत: उनके मनोवांछित लक्ष्य को पूरा करने के लिए था। इसलिए उन्होंने ज्ञानपूर्वक तथा दृढ़ संकल्प के साथ अपने पिता के घर को त्याग दिया। |
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| ध्रुव महाराज की माता सुनीति का उपदेश वस्तुत: उनके मनोवांछित लक्ष्य को पूरा करने के लिए था। इसलिए उन्होंने ज्ञानपूर्वक तथा दृढ़ संकल्प के साथ अपने पिता के घर को त्याग दिया। |
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