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श्लोक 4.7.9  |
सन्धीयमाने शिरसि दक्षो रुद्राभिवीक्षित: ।
सद्य: सुप्त इवोत्तस्थौ ददृशे चाग्रतो मृडम् ॥ ९ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब दक्ष के देह पर जानवर का सिर लगाया गया तो दक्ष को तुरन्त होश आ गया और जैसे ही वो नींद से जागा, उसने अपने सामने भगवान शिव को खड़े देखा। |
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| जब दक्ष के देह पर जानवर का सिर लगाया गया तो दक्ष को तुरन्त होश आ गया और जैसे ही वो नींद से जागा, उसने अपने सामने भगवान शिव को खड़े देखा। |
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