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श्लोक 4.7.8  |
विधाय कार्त्स्न्येन च तद्यदाह भगवान् भव: ।
सन्दधु: कस्य कायेन सवनीयपशो: शिर: ॥ ८ ॥ |
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| अनुवाद |
| शिवजी के आदेशानुसार जब सारी विधियाँ पूर्ण हो गईं तब बलि के लिए लाये हुए पशु के सिर को दक्ष के शरीर से जोड़ दिया गया। |
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| शिवजी के आदेशानुसार जब सारी विधियाँ पूर्ण हो गईं तब बलि के लिए लाये हुए पशु के सिर को दक्ष के शरीर से जोड़ दिया गया। |
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