मैत्रेय मुनि ने कहा: हे विदुर, वहाँ पर उपस्थित सभी मानव सर्वश्रेष्ठ वरदाता शिव की वाणी सुनकर अपने हृदय और आत्मा से बहुत संतुष्ट और हर्षित हुए।
Maitreya Muni said: O Vidur, all the people present there were extremely satisfied and overjoyed after listening to the words of Shiva, the bestower of boons.
तात्पर्य
इस श्लोक में भगवान शिव को mīḍhuṣṭama के रूप में वर्णित किया गया है। जोकि सभी आशीर्वाद देने वालों में से उत्तम हैं। उन्हें Āśutoṣa के रूप में भी जाना जाता है, जो इस बात का संकेत करता है कि वह बहुत जल्दी संतुष्ट और बहुत जल्दी क्रोधित हो जाते हैं। भगवद्-गीता में कहा गया है कि कम बुद्धिमान व्यक्ति भौतिक भलाई के लिए देवताओं के पास जाते हैं। इस संबंध में, लोग आम तौर पर भगवान शिव के पास जाते हैं, और क्योंकि वह हमेशा जल्दी संतुष्ट होते हैं और बिना किसी विचार के अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं, उन्हें mīḍhuṣṭama, या सभी आशीर्वाद देने वालों में सर्वश्रेष्ठ कहा जाता है। भौतिकवादी व्यक्ति हमेशा भौतिक लाभ प्राप्त करने के लिए उत्सुक रहते हैं, लेकिन वे आध्यात्मिक लाभ के बारे में गंभीर नहीं होते हैं। कभी-कभी, ऐसा भी होता है कि भगवान शिव आध्यात्मिक जीवन में सर्वश्रेष्ठ आशीर्वाद बन जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक बार एक गरीब ब्राह्मण ने भगवान शिव की पूजा आशीर्वाद के लिए की, और भगवान शिव ने भक्त को सनातन गोस्वामी से मिलने की सलाह दी। भक्त सनातन गोस्वामी के पास गया और उन्हें बताया कि भगवान शिव ने उन्हें उनसे (सनातन) सर्वश्रेष्ठ आशीर्वाद लेने की सलाह दी थी। सनातन के पास एक कसौटी थी, जिसे वह कचरे के साथ रखते थे। गरीब ब्राह्मण के अनुरोध पर, सनातन गोस्वामी ने उसे वह कसौटी दे दी, और ब्राह्मण इसे पाकर बहुत खुश हुआ। अब वह कसौटी को लोहे से छूकर जितना चाहे उतना सोना प्राप्त कर सकता था। लेकिन सनातन के जाने के बाद, उसने सोचा, "यदि कसौटी सबसे अच्छा आशीर्वाद है, तो सनातन गोस्वामी ने इसे कचरे के साथ क्यों रखा है?" इसलिए वह वापस आया और सनातन गोस्वामी से पूछा, "महोदय, अगर यह सबसे अच्छा आशीर्वाद है, तो आपने इसे कचरे के साथ क्यों रखा?" सनातन गोस्वामी ने तब उसे बताया, "वास्तव में, यह सबसे अच्छा आशीर्वाद नहीं है। पर क्या आप मुझसे सबसे अच्छा आशीर्वाद लेने के लिए तैयार हैं?" ब्राह्मण ने कहा, "हाँ, महोदय। भगवान शिव ने मुझे आपके पास सबसे अच्छे आशीर्वाद के लिए भेजा है।" तब सनातन गोस्वामी ने उसे पास के पानी में कसौटी फेंकने को कहा और फिर वापस आने को कहा। गरीब ब्राह्मण ने ऐसा ही किया, और जब वह लौटा, तो सनातन गोस्वामी ने उसे हरे कृष्ण मंत्र से दीक्षा दी। इस प्रकार भगवान शिव के आशीर्वाद से ब्राह्मण को भगवान कृष्ण के सर्वश्रेष्ठ भक्त का संग मिला और इस प्रकार उसे महा-मंत्र में दीक्षा दी गई: हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे / हरे रामा, हरे रामा, रामा रामा, हरे हरे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥