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श्लोक 4.7.57  |
तस्मा अप्यनुभावेन स्वेनैवावाप्तराधसे ।
धर्म एव मतिं दत्त्वा त्रिदशास्ते दिवं ययु: ॥ ५७ ॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार दक्ष ने यज्ञ अनुष्ठान के द्वारा विष्णु की पूजा करके, धार्मिक मार्ग का पूर्णता से अनुसरण किया। समस्त देवता जो यज्ञ में उपस्थित थे उन्होंने उसको धर्मनिष्ठ रहने का आशीर्वाद दिया और फिर चले गये। |
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| इस प्रकार दक्ष ने यज्ञ अनुष्ठान के द्वारा विष्णु की पूजा करके, धार्मिक मार्ग का पूर्णता से अनुसरण किया। समस्त देवता जो यज्ञ में उपस्थित थे उन्होंने उसको धर्मनिष्ठ रहने का आशीर्वाद दिया और फिर चले गये। |
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