स प्रसीद त्वमस्माकमाकाङ्क्षतां
दर्शनं ते परिभ्रष्टसत्कर्मणाम् ।
कीर्त्यमाने नृभिर्नाम्नि यज्ञेश ते
यज्ञविघ्ना: क्षयं यान्ति तस्मै नम: ॥ ४७ ॥
अनुवाद
हे प्रभु, हम आपके दर्शन के लिए प्रतीक्षारत थे क्योंकि हम वैदिक अनुष्ठानों के अनुसार यज्ञ करने में असमर्थ रहे हैं। अत: हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि आप हमसे प्रसन्न हों। आपके पवित्र नाम-कीर्तन से ही सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं। हम आपके सामने अपना सिर झुकाकर आपको सादर प्रणाम करते हैं।
O Lord, we have been waiting to see You because we have been unable to perform Yajna according to Vedic rituals. Therefore, we pray that You be pleased with us. All obstacles are removed by the mere chanting of Your holy name. We offer our respectful obeisances unto You.
तात्पर्य
ब्राह्मण पुजारियों को बहुत ही आशा थी कि भगवान विष्णु की उपस्थिति में अब उनका यज्ञ बिना किसी बाधा के सम्पन्न हो जायेगा। इस श्लोक में यह महत्वपूर्ण है कि ब्राह्मण कहते हैं कि, "केवल आपके पावन नाम का जाप करने से हम बाधाओं से पार पा सकते हैं, पर अब आप स्वयं यहाँ उपस्थित हैं।" भगवान शिव के शिष्यों और अनुयायियों ने दक्ष द्वारा किये जा रहे यज्ञ में बाधा डाली थी। ब्राह्मणों ने अप्रत्यक्ष रूप से भगवान शिव के अनुयायियों की आलोचना की, लेकिन क्योंकि ब्राह्मणों को भगवान विष्णु हमेशा सुरक्षा देते थे, शिव के अनुयायी यज्ञ की प्रक्रिया में उनकी सहायता नहीं कर पाए। एक कहावत है कि जब कृष्ण किसी की रक्षा करते हैं, तो कोई उसे हानि नहीं पहुँचा सकता है, और जब कृष्ण किसी को मारना चाहते हैं, तो कोई उसकी रक्षा नहीं कर सकता है। इसका ज्वलंत उदाहरण रावण है। रावण भगवान शिव का एक महान भक्त था, लेकिन जब भगवान रामचंद्र उसे मारना चाहते थे, तो भगवान शिव उसे रक्षा नहीं कर सके। यदि कोई देवता, यहाँ तक कि भगवान शिव या भगवान ब्रह्मा, किसी भक्त को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं, तो कृष्ण उस भक्त की रक्षा करते हैं। लेकिन जब कृष्ण किसी को मारना चाहते हैं, जैसे रावण या हिरण्यकश्यपु को, तो कोई देवता भी उसकी रक्षा नहीं कर सकता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥