विभिन्न ग्रहों के शासकों ने इस प्रकार कहा: हे प्रभु, हम केवल अपनी प्रत्यक्ष अनुभूति पर ही विश्वास करते हैं, और इसलिए हम आपको भौतिक जगत की सृष्टि के रूप में देख रहे हैं। लेकिन इन परिस्थितियों में हम यह नहीं जानते कि क्या हमने वास्तव में आपको अपनी भौतिक इन्द्रियों से देखा है। हमारी भौतिक इन्द्रियों से हम केवल दृश्य जगत को ही देख सकते हैं, लेकिन आप पांच तत्वों से परे हैं। आप तो छठवें तत्व हैं।
The Lokpalas of the various worlds said thus: O Lord, we believe only in our direct perception, but in this situation we do not know whether we have actually seen You with our physical senses or not. With these senses we can see only the visible world, but You are beyond the five elements. You are the sixth element. Therefore, we are seeing You as the creation of the physical world.
तात्पर्य
विभिन्न ग्रहों के अधिपति निश्चित रूप से भौतिक रूप से संपन्न और अत्यधिक घमंडी होते हैं। ऐसे लोग भगवान के पारलौकिक, शाश्वत रूप को समझने में असमर्थ होते हैं। ब्रह्म-संहिता में कहा गया है कि केवल वही व्यक्ति जो भगवद्-प्रेम से अपनी आँखों का अभिषेक कर चुके हैं, वे अपनी गतिविधियों के हर कदम पर भगवत्ता का व्यक्तित्व देख सकते हैं। साथ ही, कुंती की प्रार्थनाओं (भाग। 1.8.26) में कहा गया है कि केवल वे ही जो अकिंचन-गोचरम हैं, जो भौतिक रूप से घमंडी नहीं हैं, सर्वोच्च भगवत्ता को देख सकते हैं; अन्य भ्रमित हैं और परम सत्य के बारे में सोच भी नहीं सकते।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥