अध्वर्युणात्तहविषा यजमानो विशाम्पते ।
धिया विशुद्धया दध्यौ तथा प्रादुरभूद्धरि: ॥ १८ ॥
अनुवाद
महामुनि मैत्रेय ने विदुर से कहा: हे विदुर, जैसे ही राजा दक्ष ने यज्ञ में शुद्धचित्त से यजुर्वेद के मंत्रोच्चारण के साथ घी की आहुति डाली, वैसे ही भगवान् विष्णु अपने आदि रूप नारायण के रूप में वहाँ प्रकट हो गये।
Mahamuni Maitreya said to Vidur: O Vidur, as soon as King Daksha offered ghee with a pure mind along with the mantras of Yajurveda, Lord Vishnu appeared there in his Adi Narayana form.
तात्पर्य
भगवान विष्णु सर्वव्यापी हैं। कोई भी भक्त जो पवित्र ध्यान में, नियमों का पालन करते हुए, सेवा में और भक्ति भाव से आवश्यक मंत्रों का उच्चारण करता है, वह विष्णु को देख सकता है। ब्रह्म-संहिता में कहा गया है कि एक भक्त जिसकी आँखों में ईश्वर के प्रेम का मरहम लगा हुआ है, वह परम पुरुषोत्तम को हमेशा अपने हृदय में देख सकता है। भगवान श्यामसुंदर अपने भक्तों पर बहुत दयालु हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥