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bhagavat 4.6.18: कैलास पर्वत क्षेत्र में आम, प्रियाल, महुआ और च्यूर के वृक्ष हैं। इनके अलावा वहाँ बांस, कीचक और अन्य बाँसों की किस्में भी हैं जो इस क्षेत्र की शोभा बढ़ाती हैं।   |   bhagavat अध्याय 4.6: ब्रह्मा द्वारा शिवजी को मनाना   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 6: ब्रह्मा द्वारा शिवजी को मनाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.6.18 
खर्जूराम्रातकाम्राद्यै: प्रियालमधुकेङ्गुदै: ।
द्रुमजातिभिरन्यैश्च राजितं वेणुकीचकै: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
कैलास पर्वत क्षेत्र में आम, प्रियाल, महुआ और च्यूर के वृक्ष हैं। इनके अलावा वहाँ बांस, कीचक और अन्य बाँसों की किस्में भी हैं जो इस क्षेत्र की शोभा बढ़ाती हैं।
 
There are mango, priyal, madhuka (mahua) and ingud (chyur) trees. Apart from these, thin bamboo, kichak and other varieties of bamboos adorn the Kailash mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)