vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् भागवतम
»
स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति
»
अध्याय 6: ब्रह्मा द्वारा शिवजी को मनाना
»
श्लोक 16
श्लोक
4.6.16
स्वर्णार्णशतपत्रैश्च वररेणुकजातिभि: ।
कुब्जकैर्मल्लिकाभिश्च माधवीभिश्च मण्डितम् ॥ १६ ॥
अनुवाद
वहाँ अन्य वृक्ष भी हैं, जैसे सुनहरा कमलपुष्प, दालचीनी, मालती, कुब्ज, मल्लिका और माधवी, जो पर्वत की सुंदरता बढ़ाते हैं।
There are other trees too which enhance the beauty of the mountain such as golden lotus, cinnamon, malati, kubja, mallika and madhavi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×