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bhagavat 4.6.12: कैलास पर्वत पर हमेशा मोरों की मधुर ध्वनि और भौंरों के गुंजार की आवाज़ गूंजती रहती है। कोयलें हमेशा कूकती रहती हैं और अन्य पक्षी आपस में चहचहाते रहते हैं।   |   bhagavat अध्याय 4.6: ब्रह्मा द्वारा शिवजी को मनाना   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 6: ब्रह्मा द्वारा शिवजी को मनाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.6.12 
मयूरकेकाभिरुतं मदान्धालिविमूर्च्छितम् ।
प्लावितै रक्तकण्ठानां कूजितैश्च पतत्त्रिणाम् ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
कैलास पर्वत पर हमेशा मोरों की मधुर ध्वनि और भौंरों के गुंजार की आवाज़ गूंजती रहती है। कोयलें हमेशा कूकती रहती हैं और अन्य पक्षी आपस में चहचहाते रहते हैं।
 
The sweet voice of peacocks and the humming of bumblebees always reverberates on Mount Kailash. Cuckoos always keep chirping and other birds keep chirping among themselves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)