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श्लोक 4.5.9  |
प्रसूतिमिश्रा: स्त्रिय उद्विग्नचित्ता
ऊचुर्विपाको वृजिनस्यैव तस्य ।
यत्पश्यन्तीनां दुहितृणां प्रजेश:
सुतां सतीमवदध्यावनागाम् ॥ ९ ॥ |
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| अनुवाद |
| दक्ष की पत्नी प्रसूति और वहाँ इकट्ठी हुई अन्य महिलाएँ बहुत चिंतित होकर बोलीं: यह खतरा दक्ष ने ही सती की मौत की वजह से मोल लिया है, क्योंकि मासूम सती ने अपनी बहनों के होते हुए भी अपने शरीर का त्याग कर लिया है। |
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| दक्ष की पत्नी प्रसूति और वहाँ इकट्ठी हुई अन्य महिलाएँ बहुत चिंतित होकर बोलीं: यह खतरा दक्ष ने ही सती की मौत की वजह से मोल लिया है, क्योंकि मासूम सती ने अपनी बहनों के होते हुए भी अपने शरीर का त्याग कर लिया है। |
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