Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.5.7: उस समय यज्ञस्थल पर एकत्रित सभी लोग—पुरोहितगण, यज्ञ के प्रमुख, ब्राह्मण और उनकी पत्नियाँ—चकित होने लगे कि यह अंधकार कहाँ से आ रहा है। बाद में उन्हें समझ आया कि यह धूल भरी आंधी थी और वे सभी अत्यंत व्यथित हो गए थे। | bhagavat अध्याय 4.5: दक्ष के यज्ञ का विध्वंस । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय यज्ञस्थल पर एकत्रित सभी लोग—पुरोहितगण, यज्ञ के प्रमुख, ब्राह्मण और उनकी पत्नियाँ—चकित होने लगे कि यह अंधकार कहाँ से आ रहा है। बाद में उन्हें समझ आया कि यह धूल भरी आंधी थी और वे सभी अत्यंत व्यथित हो गए थे।
At that time all the people gathered at the place of the sacrifice-the priest, the chief host, the Brahmins and their wives-began to wonder where this darkness was coming from. Later they understood that it was a dust storm and they all became very perturbed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥