जिस तरह अनिरुद्ध के विवाह समारोह में जुए के खेल के दौरान, बलदेव ने कलिंगराज दंतवक्र के दाँत निकाल दिए थे, उसी तरह वीरभद्र ने दक्ष और पूषा दोनों के दाँत निकाल दिए थे, क्योंकि दक्ष ने भगवान शिव को शाप देते समय दाँत दिखाए थे और पूषा ने भी सहमति स्वरूप मुस्कुराते हुए दाँत दिखाए थे।
Just as Baldev had pulled out the teeth of Kalingaraj Dantavakra during the game of dice at Aniruddha's wedding, similarly Veerbhadra pulled out the teeth of both Daksha and Pusha, because Daksha had shown his teeth while cursing Shiva and Pusha had also shown his teeth while smiling in agreement.
तात्पर्य
यहाँ श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के विवाह का सन्दर्भ दिया गया है। उसने दंतवक्र की पुत्री का अपहरण किया था, और उसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। अपहरण के लिए उसे सज़ा दी जानी थी, द्वारका से सैनिकों का आगमन हुआ, जिसका नेतृत्व बलराम कर रहे थे, और क्षत्रियों के बीच लड़ाई हुई। इस प्रकार की लड़ाई बहुत आम थी, विशेषकर विवाह समारोहों के दौरान, जब हर कोई एक चुनौतीपूर्ण भावना में रहता था। उस चुनौतीपूर्ण भावना में, लड़ाई अवश्य होती थी, और ऐसी लड़ाइयों में आमतौर पर हत्या और दुर्भाग्य होता था। इस तरह की लड़ाई खत्म करने के बाद, पार्टियां समझौते पर आती थीं, और सब कुछ निपट जाता था। यह दक्ष यज्ञ ऐसे ही कार्यक्रमों के समान था। अब वे सभी - दक्ष और देवगण भग, पूषा और भृगु मुनि को भगवान शिव के सैनिकों द्वारा दंडित किया गया था, लेकिन बाद में सब कुछ शांतिपूर्ण रूप से समाप्त हो गया। इसलिए एक दूसरे से लड़ने की यह भावना बिल्कुल वैराग्यपूर्ण नहीं थी। चूँकि हर कोई बहुत शक्तिशाली था और वैदिक मंत्र या रहस्यमय शक्ति से अपनी ताकत दिखाना चाहता था, इसलिए इन सभी युद्ध कौशल को दक्ष यज्ञ में विभिन्न पक्षों द्वारा बहुत विस्तृत रूप से प्रदर्शित किया गया था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥