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bhagavat 4.5.18: लगातार पत्थरों की वर्षा ने सभी पुरोहितों और यज्ञ में भाग लेने वाले अन्य सदस्यों को अत्यधिक संकट में डाल दिया। वे अपने जीवन के भय से विभिन्न दिशाओं में भाग खड़े हुए।   |   bhagavat अध्याय 4.5: दक्ष के यज्ञ का विध्वंस   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 5: दक्ष के यज्ञ का विध्वंस  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.5.18 
सर्व एवर्त्विजो दृष्ट्वा सदस्या: सदिवौकस: ।
तैरर्द्यमाना: सुभृशं ग्रावभिर्नैकधाद्रवन् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
लगातार पत्थरों की वर्षा ने सभी पुरोहितों और यज्ञ में भाग लेने वाले अन्य सदस्यों को अत्यधिक संकट में डाल दिया। वे अपने जीवन के भय से विभिन्न दिशाओं में भाग खड़े हुए।
 
Due to the continuous rain of stones, all the priests and other members gathered for the yajna were in great trouble. Fearing for their lives, they scattered in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)