Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.5.14: कुछ सैनिकों ने यज्ञ-पंडाल को संभालने वाले खंभों को गिरा दिया, कुछ स्त्रियों के कक्ष में घुस गए, कुछ ने यज्ञस्थल को तहस-नहस करना शुरू कर दिया और कुछ ने रसोई घर और रहने वाले कमरों में घुसकर उपद्रव मचा दिया। | bhagavat अध्याय 4.5: दक्ष के यज्ञ का विध्वंस । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
केचिद्बभञ्जु: प्राग्वंशं पत्नीशालां तथापरे ।
सद आग्नीध्रशालां च तद्विहारं महानसम् ॥ १४ ॥
अनुवाद
कुछ सैनिकों ने यज्ञ-पंडाल को संभालने वाले खंभों को गिरा दिया, कुछ स्त्रियों के कक्ष में घुस गए, कुछ ने यज्ञस्थल को तहस-नहस करना शुरू कर दिया और कुछ ने रसोई घर और रहने वाले कमरों में घुसकर उपद्रव मचा दिया।
Some soldiers broke down the pillars of the sacrificial pandal, some entered the women's room, some started destroying the sacrificial place and some entered the kitchen and residential rooms.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥