यस्त्वन्तकाले व्युप्तजटाकलाप:
स्वशूलसूच्यर्पितदिग्गजेन्द्र: ।
वितत्य नृत्यत्युदितास्त्रदोर्ध्वजान्
उच्चाट्टहासस्तनयित्नुभिन्नदिक् ॥ १० ॥
अनुवाद
प्रलय के समय, शिव के बाल बिखर जाते हैं और वे अपने त्रिशूल से दिशाओं के शासकों (दिक्पतियों) को बेध देते हैं। वे गर्वपूर्वक अट्टहास करते हुए ताण्डव नृत्य करते हैं और दिक्पतियों की भुजाओं को पताकाओं के समान बिखेर देते हैं, जिस तरह मेघों की गर्जना से आकाश में बादल छितर जाते हैं।
At the time of pralaya, Shiva's hair is scattered and he pierces the rulers of the various directions (Dikpatis) with his trident. Laughing proudly, he performs the tandava dance and scatters the arms of the Dikpatis like flags, just as the thunder of the clouds scatters the clouds in all the worlds.
तात्पर्य
प्रसूति, जो अपने दामाद भगवान शिव की शक्ति और सामर्थ्य की सराहना करती थीं, बताती हैं कि विघटन के समय वह क्या करते हैं। इस विवरण से पता चलता है कि भगवान शिव की ताकत इतनी महान है कि दक्ष की शक्ति उसकी तुलना में लाई ही नहीं जा सकती। विघटन के समय, भगवान शिव हाथ में त्रिशूल लिए, विभिन्न ग्रहों के शासकों पर नृत्य करते हैं, और उनके बाल इसी तरह बिखरे रहते हैं, जैसे बारिश की मूसलाधार धाराओं में विभिन्न ग्रहों को डुबाने के लिए बादल सभी दिशाओं में बिखरे रहते हैं। विघटन के आखिरी चरण में, सभी ग्रह पानी से भर जाते हैं, और वह पानी भरना भगवान शिव के नृत्य के कारण होता है। इस नृत्य को प्रलय नृत्य, या विघटन का नृत्य कहा जाता है। प्रसूति समझ सकती थीं कि आगे आने वाले खतरे केवल उनकी बेटी की दक्ष द्वारा उपेक्षा किए जाने के कारण ही नहीं हैं, बल्कि भगवान शिव की प्रतिष्ठा और सम्मान की उपेक्षा के कारण भी हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥