श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 30: प्रचेताओं के कार्यकलाप  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.30.8 
श्रीभगवानुवाच
वरं वृणीध्वं भद्रं वो यूयं मे नृपनन्दना: ।
सौहार्देनापृथग्धर्मास्तुष्टोऽहं सौहृदेन व: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा: हे राजकुमारों, मैं तुम्हारे मित्रतापूर्ण रिश्तों से बहुत खुश हूँ। तुम सभी एक ही कार्य में लगे हुए हो—भक्ति। मैं तुम्हारी मित्रता से इतना प्रसन्न हूँ कि मैं तुम्हारा कल्याण चाहता हूँ। अब तुम जो वर चाहो माँग सकते हो।
 
The Lord said: O princes, I am very pleased with the friendly relations between you. All of you are engaged in the same work—devotion. I am so pleased with your friendship that I wish for your welfare. Now you may ask for any boon you wish.
तात्पर्य
चूंकि राजा प्राचीनबर्हिषत के सभी पुत्र कृष्ण चेतना में एकजुट थे, भगवान उनसे बहुत प्रसन्न थे। राजा प्राचीनबर्हिषत का प्रत्येक पुत्र एक व्यक्तिगत आत्मा था, लेकिन वे भगवान को पारलौकिक सेवा अर्पित करने में एकजुट थे। सर्वोच्च भगवान को संतुष्ट करने या भगवान की सेवा करने का प्रयास करने वाली व्यक्तिगत आत्माओं की एकता ही वास्तविक एकता है। भौतिक संसार में ऐसी एकता संभव नहीं है। भले ही लोग आधिकारिक रूप से एकजुट हो सकते हैं, लेकिन उन सभी के हित अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, संयुक्त राष्ट्र में, सभी राष्ट्रों की अपनी विशिष्ट राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएँ होती हैं, और परिणामस्वरूप वे एकजुट नहीं हो सकते। इस भौतिक संसार में व्यक्तिगत आत्माओं के बीच की फूट इतनी प्रबल होती है कि कृष्ण चेतना के समाज में भी, सदस्य कभी-कभी अपनी भिन्न राय और भौतिक चीजों की ओर झुकाव के कारण अलग-थलग दिखाई पड़ते हैं। वास्तव में, कृष्ण चेतना में दो मत नहीं हो सकते। केवल एक ही लक्ष्य है: कृष्ण की यथाशक्ति सेवा करना। यदि सेवा को लेकर कोई असहमति है, तो ऐसी असहमति को आध्यात्मिक माना जाना चाहिए। जो वास्तव में भगवान के व्यक्तित्व के सेवक में तल्लीन हैं, वे किसी भी परिस्थिति में एकजुट नहीं हो सकते। यह भगवान को बहुत प्रसन्न करता है और वह अपने भक्तों को सभी प्रकार के आशीर्वाद देने के लिए इच्छुक होते हैं, जैसा कि इस श्लोक में दर्शाया गया है। हम देख सकते हैं कि भगवान राजा प्राचीनबर्हिषत के पुत्रों को सभी आशीर्वाद देने के लिए तुरंत तैयार हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)