एक राजा हमेशा अपने मंत्रियों, सचिवों और सेनापतियों के साथ रहता है, और भगवान विष्णु भी अपने अनुयायियों - देवताओं, महान ऋषियों, संतों और अन्य लोगों के साथ रहते हैं। वह कभी अकेले नहीं होते। फलस्वरूप भगवान के अवैयक्तिक होने का कोई प्रश्न ही नहीं है। वह हमेशा स्वयं, भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व होते हैं, और उनके सहयोगी भी व्यक्ति होते हैं। इस श्लोक में दिए गए विवरण से, गरुड़ किन्नर ग्रह के प्रतीत होते हैं। किन्नर ग्रह के निवासियों में गरुड़ के समान ही विशेषताएँ होती हैं। उनकी शारीरिक विशेषताएँ मनुष्य के समान होती हैं, लेकिन उनके पंख होते हैं। गीत-कीर्तिः शब्द इंगित करता है कि किन्नरलोक के निवासी भगवान की महिमा गाने में बहुत निपुण होते हैं। ब्रह्म-संहिता में कहा गया है, जगत-अंड-कोटि-कोटिष्व अशेष-वसुधा-दि-विभूति-भिन्नम: प्रत्येक ब्रह्माण्ड में विभिन्न प्रकार के ग्रह होते हैं, और प्रत्येक ग्रह में विशिष्ट विशेषताएँ होती हैं। इस श्लोक के आधार पर, हम समझ सकते हैं कि किन्नरलोक में निवासी अपने पंखों से उड़ सकते हैं। सिद्धलोक नाम का एक ग्रह भी है, जहाँ निवासी बिना पंखों के भी उड़ सकते हैं। इस प्रकार प्रत्येक ग्रह में कुछ विशिष्ट सुविधा होती है। यही भगवान के विविध सृजन की सुंदरता है।
