कृष्ण - सूर्य-सम; माया हय अंधकार
याहाँ कृष्ण, ताहाँ नाहि मायारा अधिकार
प्रभु बिलकुल तेजस्वी सूर्य की तरह हैं। परिणामस्वरूप, जब भी भगवान सर्वव्यापी व्यक्तित्व होते हैं, तब वहाँ अंधकार या अज्ञान नहीं हो सकता। वस्तुतः यह अंधकारमय ब्रह्मांड सूर्य द्वारा प्रकाशित किया जाता है, लेकिन सूर्य और चंद्रमा केवल सर्वोच्च भगवान के शारीरिक तेज को दर्शाते हैं। भगवद् गीता (7.8) में भगवान कहते हैं, प्रभास्मि शशि-सूर्ययोः: "मैं सूर्य और चंद्र दोनों की प्रकाशमान ऊर्जा हूँ।" निष्कर्ष यह है कि सभी जीवन की उत्पत्ति सर्वोच्च भगवान व्यक्तित्व का शारीरिक तेज है। इसकी पुष्टि ब्रह्म-संहिता में भी की गई है: यस्य प्रभा प्रभवतो जगद-अण्डा-कोटि। सर्वोच्च भगवान व्यक्तित्व के शारीरिक तेज द्वारा प्रकाशित होने के कारण, सब कुछ सभी अंधकारों से मुक्त है।
