श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 30: प्रचेताओं के कार्यकलाप  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  4.30.46 
भस्मसात्क्रियमाणांस्तान् द्रुमान्वीक्ष्य पितामह: ।
आगत: शमयामास पुत्रान् बर्हिष्मतो नयै: ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
जब यह देखा कि पृथ्वी के सारे वृक्ष जलकर राख हो गए हैं, तब ब्रह्मा जी तुरंत राजा बर्हिष्मान के पुत्रों के पास आए और उन्होंने तर्कपूर्ण शब्दों से उन्हें शांत किया।
 
Seeing that all the trees on the earth were burning to ashes, Brahmaji immediately came to the sons of King Barhisman and pacified them with logical words.
तात्पर्य
जब भी किसी भी ग्रह पर कोई असामान्य घटना होती है, तो सम्पूर्ण ब्रह्मांड के प्रभारी भगवान ब्रह्मा, तुरंत स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आते हैं। भगवान ब्रह्मा तब भी आए जब हिरण्यकशिपु ने घोर तपस्या और संयम किया और पूरे ब्रह्मांड को हिला दिया। किसी भी संस्थान में एक जिम्मेदार व्यक्ति संस्थान के भीतर शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए हमेशा सावधान रहता है। इसी तरह, भगवान ब्रह्मा को भी इस ब्रह्मांड के भीतर शांति और सद्भाव बनाए रखने की अनुमति दी जाती है। इसके परिणामस्वरूप उन्होंने राजा बृहिसम के पुत्रों को अच्छे तर्क से शांत किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)